अध्यात्म के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल

अध्यात्म के क्षेत्र में 'वैश्विक शिव शिष्य परिवार' जगद्गुरु शिव एवं उनकी शिष्यता की संकल्पना का निरंतर प्रचार-प्रसार कर रहा है। यह विचार भारतीय आध्यात्मिक धरोहर के अत्यंत अनमोल रत्नों में से एक है।

एक सुसंगठित अवधारणा के रूप में इसकी शुरुआत **१९८० के दशक के प्रारंभ में परम आदरणीय साहब श्री हरीन्द्रानंद जी** द्वारा की गई थी। उन्होंने तंत्र, मंत्र और अनेक तांत्रिक साधनाओं के शोध में वर्षों बिताए, परंतु जिस परम शांति की वे खोज में थे, वह उन्हें नहीं मिली।

अंततः उन्होंने अपने अंतर में यह सत्य अनुभूति की कि **शिव ही समस्त भूत, वर्तमान और भविष्य के ज्ञान के मूल स्रोत हैं।** वे ही उन सभी दिव्य अनुभूतियों के अक्षुण्ण स्रोत हैं जिनकी तलाश हर निष्ठावान आत्मा करती है। उन्हें अपने भीतर से यह अंतर-आदेश मिला कि 'शिव को गुरु बनाओ' और जगत् में शिव-गुरु का संदेश फैलाओ।

सामाजिक कल्याण एवं जनसेवा के क्षेत्र में कार्य

वैश्विक शिव शिष्य परिवार केवल आध्यात्मिक चेतना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने हेतु समर्पित है:

  • अन्न व आश्रय व्यवस्था: निर्धन एवं असहाय व्यक्तियों के लिए भोजन एवं वस्त्र की निःशुल्क व्यवस्था करना।
  • चिकित्सा शिविर एवं स्वास्थ्य जागरूकता: ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविरों का आयोजन तथा स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना।
  • पर्यावरण संरक्षण एवं जल संसाधन: वृक्षारोपण, प्राकृतिक संतुलन की रक्षा तथा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल संसाधनों का निर्माण व रखरखाव।
  • सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान: कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, जीव दया, तथा नशा मुक्ति अभियान का नियमित संचालन।