Maheshwar Shiva — The Universal Guru
Discourse & Message by Revered Sahib Shri Harindrananda Ji
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समस्त गुरु भाई-बहनों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

शिव शिष्यता के प्रणेता परम श्रद्धेय साहबश्री हरींद्रानंद जी
प्रेम, विश्वास, समर्पण और सुरक्षा के अटूट संकल्प का महापर्व रक्षाबंधन केवल सूत के धागों का त्योहार नहीं, बल्कि अंतर्मन के पावन भावों और आत्मिक संबंधों का उत्सव है।
शिव शिष्यता के प्रणेता परम श्रद्धेय साहबश्री हरींद्रानंद जी ने सदैव यह संदेश दिया कि जब हम देवाधिदेव महादेव को अपना गुरु स्वीकार करते हैं, तो पूरा संसार एक परिवार के रूप में दिखने लगता है। शिव शिष्य परिवार में प्रत्येक ‘गुरु भाई’ और ‘गुरु बहन’ के बीच का संबंध उसी पवित्र, निस्वार्थ और आध्यात्मिक स्नेह पर आधारित है, जो एक-दूसरे के आध्यात्मिक उत्थान और रक्षा का संबल बनता है।
“जगतगुरु शिव जब हमारे गुरु बन जाते हैं, तो भय और भटकाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। आत्मिक चेतना का जागरण ही आत्मा की सबसे बड़ी रक्षा है।”— परम श्रद्धेय साहबश्री हरींद्रानंद जी
इस मंगल अवसर पर आइए हम सब मिलकर जगतगुरु शिव से दया की याचना करें और साहबश्री द्वारा दिए गए तीनों सूत्रों (दया माँगना, चर्चा करना, प्रणाम करना) को अपने जीवन में और अधिक दृढ़ता से उतारने का संकल्प लें।
